NDTV समेत पूरे मीडिया को खुला पत्र

आदरणीय मीडियाकर्मी मित्रों एवं गुरुजनों, इस 5 नवम्बर 2016 को एक अलसाई कोहरे में लिपटी उनींदी सुबह में आपक सभी से मुख़ातिब होकर ये पत्र ल...
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बे-ख़्याल ज़िंदगी का हाल

अक्सर मैं अपने लेख कवितओं से ख़त्म करता हूँ, भावनाओं को संबल देने की कोशिश रहती है । ऐसा पहली बार हो रहा है कि कविता पहले लिखने ...
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कश्मीर : स्वप्न से दुःस्वप्न तक

मन को विचलित सा कर दिया है। जी हां आपके और हमारे मन को। किसने? कश्मीर घाटी के हालातों ने। बहुत ही थका देने वाली मानसिक जद्दोजहद में...
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अकेले चने ने भाड़ फोड़ दिया

भाग- 1 के लिए यहाँ जाएं भाग दो प्रकाशित करने में काफी वक़्त ले लिया है, ऐसा लगता है I मुंबई में आज इस शनिवार के दिन अपने कमरे...
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सूखा पानी

कलम सूख़ रही है शायद इन दिनों I गर्मी बहुत है I लिखने की कोशिश में कागज़ फट जाता है बार बार I पानी गीला होता था सुना और देखा था पर सूखा प...
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तुम क्यों जलाओगे मशाल मेरे लिए

आज देश में रोज होते बलात्कारों ने देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया, अछूता मेरा मन भी न रहा। और निर्भया ही क्यों, इस समाज में स...
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सुलगती चिंगारी धधकते शोले।

आज से ठीक 4 दिन पहले एक लेख लिखा था। पर वो छाप न सका, तकनीक की अति की भेंट हो गया वो। खैर, आज चार दिन बाद हालात कुछ और है और मौसम क...
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